नई दिल्ली — भारत को एक वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक निर्णायक कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई, 2026 को मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को अपनी मंजूरी दे दी। 62,500 करोड़ रुपये के मजबूत बजटीय परिव्यय द्वारा समर्थित यह ऐतिहासिक पहल, 'मेक इन इंडिया' विजन और 2047 तक 'विकसित भारत' के व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह योजना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण परिदृश्य को बदलने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और पूरे देश में पर्याप्त आर्थिक अवसर पैदा करने के लिए सावधानीपूर्वक डिज़ाइन की गई है।
MPMS एक रणनीतिक हस्तक्षेप का प्रतिनिधित्व करती है जिसका उद्देश्य न केवल वैश्विक निवेश को आकर्षित करना है, बल्कि मोबाइल फोन उत्पादन के लिए एक जीवंत घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को भी पोषित करना है। वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच साल की अवधि के साथ, यह योजना एक संरचित प्रोत्साहन ढाँचा प्रदान करती है जिससे इस क्षेत्र में उत्पादन मात्रा और मूल्यवर्धन दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह दीर्घकालिक दृष्टिकोण औद्योगिक नीति के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो अल्पकालिक लाभों से परे जाकर ऐसी स्थायी विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण करता है जो वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं का सामना कर सकें।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई, 2026 को MPMS को मंजूरी दी।
- योजना का बजटीय परिव्यय 62,500 करोड़ रुपये है।
- कार्यकाल 5 वर्ष है, वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक।
- पात्र बिक्री पर प्रोत्साहन 2.25% से 5% तक है।
- घरेलू घटक सोर्सिंग के लिए 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन।
भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षा में एक नया अध्याय
पिछले एक दशक में मोबाइल फोन विनिर्माण में भारत की यात्रा में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। मोबाइल फोन के शुद्ध आयातक होने से, देश लगातार रैंक में ऊपर चढ़कर विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया है। यह बदलाव काफी हद तक नीतिगत हस्तक्षेपों की एक श्रृंखला और सरकार द्वारा पोषित अनुकूल व्यावसायिक वातावरण से प्रेरित हुआ है। MPMS इसी नींव पर आधारित है, जिसका लक्ष्य भारत को एक असेंबली हब से उच्च-मूल्य वाले घटकों और उन्नत उपकरणों का उत्पादन करने में सक्षम एक परिष्कृत विनिर्माण आधार में बदलना है।
योजना का डिज़ाइन वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला की सूक्ष्म समझ को दर्शाता है। पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% तक की भिन्न प्रोत्साहन दरें प्रदान करके, सरकार का लक्ष्य निर्माताओं को अपने परिचालन का विस्तार करने और अपनी उत्पादन दक्षता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा, प्रमुख घटकों की घरेलू सोर्सिंग के लिए 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान करना स्थानीय मूल्यवर्धन को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विशेष पहलू घटक आपूर्तिकर्ताओं के एक स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
