2047 तक 'विकसित भारत' की ओर अपना रास्ता तय करने वाले राष्ट्र के रूप में, भारत की विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति कभी इतनी गतिशील या रणनीतिक रूप से सूक्ष्म नहीं रही है। पिछले सप्ताह ने इस दृष्टिकोण का एक सम्मोहक प्रमाण प्रस्तुत किया है, जिसमें दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने हमारे राष्ट्र की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और आर्थिक विकास व तकनीकी उन्नति के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है। हमने 2030 तक रूस के साथ 50 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी आपसी निवेश लक्ष्य को निर्धारित होते देखा है, साथ ही भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौते के आधिकारिक सक्रियण को भी। ये अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं; ये सावधानीपूर्वक नियोजित कदम हैं जो एक आत्मविश्वास से भरे, आत्मनिर्भर भारत को दर्शाते हैं जो अपनी शर्तों पर दुनिया के साथ जुड़ रहा है, राष्ट्रीय हित और दीर्घकालिक समृद्धि को प्राथमिकता दे रहा है।
मेरे अवलोकन एक स्पष्ट पैटर्न का सुझाव देते हैं: भारत एक जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य को कुशलता से नेविगेट कर रहा है, ऐसे साझेदारी बना रहा है जो पारस्परिक रूप से लाभकारी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। जोर पूरी तरह से हमारी ताकतों – एक विशाल बाजार, एक बढ़ता हुआ प्रतिभा पूल, और सुधार के लिए प्रतिबद्ध सरकार – का लाभ उठाने पर है ताकि पूंजी और प्रौद्योगिकी को आकर्षित किया जा सके जो हमारे विकास के अगले चरण को शक्ति प्रदान करेगा। रूस जैसे पारंपरिक भागीदारों और इज़राइल जैसे उभरते रणनीतिक सहयोगियों दोनों के साथ यह दोहरी-ट्रैक जुड़ाव, हमारी स्वतंत्र विदेश नीति और आर्थिक राज्य-शिल्प के प्रति हमारे व्यावहारिक दृष्टिकोण के बारे में बहुत कुछ कहता है।
रूस के साथ नए आर्थिक मोर्चे गढ़ना
मॉस्को से हुई घोषणा, जिसमें 2030 तक रूस के साथ 50 अरब डॉलर के आपसी निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, हमारे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से गहरा करता है। यह केवल व्यापार के बारे में नहीं है; यह उन क्षेत्रों में सह-निर्माण और साझा समृद्धि के बारे में है जो भविष्य की आर्थिक लचीलापन के लिए महत्वपूर्ण हैं। फोकस क्षेत्र – उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज और हरित प्रौद्योगिकी – मनमाने विकल्प नहीं हैं। वे आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के स्तंभ हैं और ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भारत अपनी घरेलू क्षमताओं को बढ़ाना और बाहरी कमजोरियों पर निर्भरता कम करना चाहता है। उन्नत विनिर्माण हमारी 'मेक इन इंडिया' पहल के साथ पूरी तरह से मेल खाता है, जिसका लक्ष्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलना है। इस क्षेत्र में संयुक्त उद्यम अत्याधुनिक तकनीक और प्रक्रियाओं को लाने, उच्च-कौशल वाली नौकरियां पैदा करने और हमारे औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देने का वादा करते हैं।
मुख्य तथ्य
- भारत और रूस ने 2030 तक 50 अरब डॉलर के आपसी निवेश का लक्ष्य रखा है।
- फोकस क्षेत्र: उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, हरित प्रौद्योगिकी।
- औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 'भारत के लिए रूस में निर्माण' मॉडल को बढ़ावा दिया गया।
- भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता 4 जुलाई, 2026 को लागू हुआ।
- भारत ने अपनी लागत प्रभावी कुशल कार्यबल और निवेश-अनुकूल सुधारों पर प्रकाश डाला।
इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक प्रौद्योगिकी की जीवनरेखा हैं, इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना तक। पहुंच सुरक्षित करना और प्रसंस्करण क्षमता विकसित करना
