एक राष्ट्र के रूप में, हम अक्सर अपनी यात्रा पर विचार करते हैं, उन शक्तियों को समझने की कोशिश करते हैं जो हमारे भाग्य को आकार देती हैं। गत गुरुवार, 2 जुलाई, 2026 को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए, ऐसी ही एक यात्रा का एक सम्मोहक आख्यान प्रस्तुत किया – एक गहन आर्थिक परिवर्तन की यात्रा। उनका संबोधन केवल एक राजनयिक पहल नहीं था, बल्कि भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति थी, जो एक दशक के अथक सुधारों और प्रगति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर आधारित है।
प्रधान मंत्री का यह दावा कि भारत पिछले 12 वर्षों से निरंतर सुधार के 'काइज़न' दर्शन द्वारा निर्देशित होकर 'अपने आर्थिक डीएनए को बदल रहा है', नए भारत की भावना के साथ गहराई से प्रतिध्वनित होता है। यह सिर्फ बयानबाजी नहीं है; यह एक रणनीतिक, दीर्घकालिक दृष्टिकोण का प्रमाण है जो आर्थिक स्पेक्ट्रम में वृद्धिशील फिर भी प्रभावशाली परिवर्तनों को प्राथमिकता देता है। हम एक ऐसे राष्ट्र को देख रहे हैं जो पुरानी प्रतिमानों के अवशेषों को त्याग रहा है और दक्षता, नवाचार और वैश्विक साझेदारी पर निर्मित भविष्य को अपना रहा है।
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य का मेरा विश्लेषण प्रधान मंत्री के आशावादी दृष्टिकोण की पुष्टि करता है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा है, यह तथ्य पिछले वित्तीय वर्ष में हमारी प्रभावशाली 7.7% जीडीपी वृद्धि से रेखांकित होता है। यह वृद्धि आकस्मिक नहीं है; यह जानबूझकर किए गए नीतिगत विकल्पों और भारत की अपार क्षमता को उजागर करने पर केंद्रित एक शासन मॉडल का सीधा परिणाम है। 'काइज़न' दर्शन, जो पारंपरिक रूप से विनिर्माण उत्कृष्टता से जुड़ा है, को राष्ट्रीय आर्थिक नीति पर चतुराई से लागू किया गया है, जिससे एक ऐसा वातावरण बन रहा है जहाँ हर सुधार, हर नीतिगत बदलाव, एक बड़ी, अधिक लचीली आर्थिक संरचना में योगदान देता है।
मुख्य तथ्य
- पीएम मोदी ने 2 जुलाई, 2026 को भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित किया।
- पिछले वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी 7.7% बढ़ी।
- भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
- जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) ने लगातार चार वर्षों तक भारत को जापानी व्यवसायों के लिए सबसे आशाजनक गंतव्य के रूप में स्थान दिया है।
- पीएम मोदी ने कराधान, शासन और व्यावसायिक नियमों में अगली पीढ़ी के सुधारों पर प्रकाश डाला।
सुधार: एक नए आर्थिक युग के स्तंभ
प्रधान मंत्री मोदी द्वारा व्यक्त किए गए इस परिवर्तन का मूल 'अगली पीढ़ी के सुधारों' में निहित है, जो कराधान, शासन और व्यावसायिक नियमों तक फैले हुए हैं। ये सतही बदलाव नहीं हैं, बल्कि व्यापार करने में आसानी बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धी आर्थिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए मौलिक बदलाव हैं। हमने देखा है कि सरकार ने व्यवस्थित रूप से पुराने नियमों को खत्म किया है, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है और एक पारदर्शी और कुशल प्रणाली बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है। अधिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने और लक्षित प्रोत्साहन प्रदान करने पर जोर वैश्विक निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संकेत है: भारत व्यापार के लिए खुला है, और यह विकास को सुविधाजनक बनाने के बारे में गंभीर है।
विचार करें कि

