भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में एक निश्चित मार्ग पर अग्रसर है, एक ऐसा दृष्टिकोण जो 'विकसित भारत' पहल में समाहित है। राष्ट्र का प्रक्षेपवक्र आर्थिक विकास, डिजिटल समावेशन, बुनियादी ढांचे के विकास और वैश्विक मंच पर अपनी सांस्कृतिक पहचान की पुनः पुष्टि को समाहित करते हुए एक बहुआयामी परिवर्तन से चिह्नित है। गतिशील परिवर्तन की यह अवधि नीतिगत हस्तक्षेपों और रणनीतिक पहलों की एक श्रृंखला द्वारा समर्थित है जो भारत के घरेलू परिदृश्य को नया आकार दे रही है और इसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति को बढ़ा रही है।

वर्तमान प्रशासन का दीर्घकालिक विकास और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने से भारत विकास के एक नए युग में प्रवेश कर गया है। रिकॉर्ड-तोड़ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से लेकर डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं को व्यापक रूप से अपनाने तक, यह कथा त्वरित प्रगति की है। यह गति केवल आर्थिक नहीं है; यह सामाजिक कल्याण, रक्षा आधुनिकीकरण और भारत के सभ्यतागत मूल्यों के आत्मविश्वासपूर्ण प्रक्षेपण तक फैली हुई है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है।

आर्थिक परिवर्तन का इंजन

भारत की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन और वृद्धि प्रदर्शित की है, जो लगातार वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह मजबूत प्रदर्शन संरचनात्मक सुधारों और निवेश को आकर्षित करने तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए अनुकूल नीतिगत वातावरण का सीधा परिणाम है। सरकारी आंकड़े लगातार जीडीपी वृद्धि का संकेत देते हैं, जो भारत को वैश्विक आर्थिक विस्तार में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है। हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो भारत की आर्थिक क्षमता और स्थिर नीतिगत ढांचे में अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। पूंजी का यह प्रवाह रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।

कर संग्रह रिकॉर्ड, विशेष रूप से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व, ने बार-बार अपेक्षाओं को पार किया है, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण और बेहतर अनुपालन का संकेत है। यह बढ़ी हुई राजकोषीय क्षमता सरकार को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण के लिए अधिक संसाधन प्रदान करती है। पूंजीगत व्यय पर जोर देने से भौतिक बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व निर्माण हुआ है। हजारों किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग जोड़े गए हैं, जो दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ते हैं और रसद दक्षता में सुधार करते हैं। प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों में मेट्रो रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे शहरी भीड़ कम हुई है और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिला है। नए हवाई अड्डों और मौजूदा हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण ने हवाई संपर्क को काफी बढ़ावा दिया है, जिससे व्यापार और पर्यटन को सुविधा मिली है।

मुख्य तथ्य

  • भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो जल्द ही तीसरी स्थिति तक पहुंचने की आकांक्षा रखता है।
  • हाल के वर्षों में सालाना 10,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है।
  • यूपीआई लेनदेन प्रति माह 10 अरब से अधिक हो गए हैं, जो बड़े पैमाने पर डिजिटल अपनाने को दर्शाता है।
  • 3 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक