संकट में भी अडिग भारत: मोदी जी का सशक्त नेतृत्व
जब पूरी दुनिया पश्चिम एशिया के युद्ध (यूएस-इजरायल-ईरान संघर्ष) की भयावहता से कांप रही है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सदन में खड़े होकर 140 करोड़ भारतीयों को जो भरोसा दिलाया, वह एक सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व की पहचान है। मोदी जी ने स्पष्ट कर दिया कि चाहे संकट कितना भी बड़ा हो, भारत का हित और भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
1. संकट में 'टीम इंडिया' का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने संबोधन में वर्तमान युद्ध को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक "बड़ी परीक्षा" बताया। उन्होंने विशेष रूप से राज्यों से अपील की कि वे 'टीम इंडिया' की भावना से काम करें। उनका यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो रही हैं और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
कालाबाजारी पर प्रहार: मोदी जी ने राज्यों को सतर्क किया कि युद्ध के समय में जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि गरीब और मध्यम वर्ग को इस वैश्विक संकट की आंच नहीं आने देनी चाहिए। मोदी जी ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहे और कीमतें नियंत्रण में रहें। उन्होंने जमाखोरों और कालाबाजारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।
मजदूरों की चिंता: बिहार जैसे राज्यों के लिए मोदी जी का यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है कि प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा हर हाल में की जाए। प्रधानमंत्री ने राज्यों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्गों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि सरकार इन वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
2. ऊर्जा सुरक्षा: एलपीजी और तेल का संकट प्रबंधन
आज जब 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में तनाव के कारण दुनिया भर के तेल टैंकर फंसे हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत की तैयारी का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
विविधता की शक्ति: मोदी जी ने बताया कि पिछले 11-12 वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों का विस्तार 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है। आज हम केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं हैं; रूस, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों से हमारा बढ़ता आयात हमें सुरक्षित रख रहा है। भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए हैं। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है। रूस से तेल का आयात, जो पहले नगण्य था, अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। अमेरिका से एलएनजी का आयात भी बढ़ा है।
एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति: भारत अपनी 60% एलपीजी आयात करता है। मोदी जी ने आश्वस्त किया कि घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष 'एम्पावर्ड ग्रुप्स' बनाए हैं। उज्ज्वला योजना की करोड़ों लाभार्थी बहनों की रसोई में गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार एलपीजी की आपूर्ति को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष 'एम्पावर्ड ग्रुप्स' बनाए गए हैं। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं, और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इन महिलाओं को एलपीजी की आपूर्ति में कोई कमी न हो।
सामरिक भंडार: मोदी जी ने जानकारी दी कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का सामरिक तेल भंडार है और 65 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त क्षमता पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सामरिक तेल भंडार का निर्माण किया है। यह भंडार आपात स्थिति में तेल की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में मदद करता है। सरकार इस भंडार की क्षमता को और बढ़ाने पर काम कर रही है। वर्तमान में, भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का सामरिक तेल भंडार है, और 65 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त क्षमता पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। 2024 में विशाखापत्तनम और पादुर में अतिरिक्त क्षमता का निर्माण कार्य पूरा हो गया था, और 2025 में ओडिशा के चांदीखोल में भी एक नया भंडार बनकर तैयार हो गया। इन भंडारों के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भी मजबूत हुई है।
3. रक्षा और समुद्री सुरक्षा: 'न्यू इंडिया' की धमक
युद्ध के मैदान में भारत आज एक 'मूकदर्शक' नहीं बल्कि एक 'सक्षम शक्ति' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
रक्षा में आत्मनिर्भरता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में रक्षा बजट और स्वदेशी निर्माण में जो उछाल आया है, उसका लाभ आज दिख रहा है। सप्लाई चेन बाधित होने के बावजूद हमारी सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं। भारत सरकार 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत रक्षा उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। रक्षा बजट में लगातार वृद्धि की गई है, और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां बनाई गई हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि आज भारत कई रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है। 2025 में, भारत ने 'तेजस' हल्के लड़ाकू विमान का पहला बैच वियतनाम को निर्यात किया, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक बड़ा उदाहरण है।
ऑपरेशन सर्वत्र: मोदी जी ने बताया कि अब तक 3,75,000 से अधिक भारतीयों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकाला गया है। भारतीय नौसेना के जहाज हमारे व्यापारिक बेड़ों की सुरक्षा कर रहे हैं, जो भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रमाण है। पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान, भारत सरकार ने 'ऑपरेशन सर्वत्र' के तहत 3,75,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला है। भारतीय नौसेना के जहाज व्यापारिक बेड़ों की सुरक्षा कर रहे हैं और मानवीय सहायता भी पहुंचा रहे हैं। यह भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रमाण है। 2026 तक, भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी बेड़े को और मजबूत किया है, जिसमें स्वदेशी परमाणु पनडुब्बियां भी शामिल हैं। आईएनएस अरिघाट, जो 2024 में कमीशन किया गया, भारतीय नौसेना की ताकत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. 12 वर्षों का रूपांतरण: समस्याओं से समाधान तक
2014 के भारत और 2026 के भारत में जमीन-आसमान का अंतर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
ग्रीन एनर्जी: मोदी जी के विजन से सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है। भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास किया है। सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है। भारत सरकार 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में बड़े सौर ऊर्जा पार्क स्थापित किए गए हैं, जो भारत की हरित ऊर्जा क्रांति का प्रतीक हैं।
इथेनॉल ब्लेंडिंग: जो 2014 में मात्र 1% थी, आज 20% के पार है, जिससे सालाना ₹1 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बच रही है। इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाया गया है। 2014 में यह मात्र 1% था, जो आज 20% के पार है। इससे सालाना ₹1 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बच रही है और किसानों को भी लाभ हो रहा है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
रेलवे और मेट्रो: रेलवे का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण और मेट्रो नेटवर्क का 250 किमी से 1100 किमी तक विस्तार मोदी जी के आधुनिक भारत के सपने को सच कर रहा है। भारत ने रेलवे और मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। रेलवे का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण किया जा रहा है, और मेट्रो नेटवर्क 250 किमी से बढ़कर 1100 किमी तक पहुंच गया है। इससे शहरों में यातायात सुगम हुआ है और प्रदूषण कम हुआ है। दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु जैसे शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार लोगों के लिए जीवन रेखा बन गया है।
निष्कर्ष: वैश्विक नेतृत्व का भारतीय मॉडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत को वैश्विक मंच पर 'शांति का दूत' और 'समाधान का केंद्र' बना दिया है। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान, भारत ने शांति स्थापित करने और मानवीय सहायता पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और स्थिरता की वकालत की है।
कल के भाषण ने सिद्ध कर दिया कि मोदी जी के पास संकट को अवसर में बदलने का सामर्थ्य है।
"दुनिया में युद्ध है, लेकिन भारत में मोदी जी का विश्वास और विकास का संकल्प अटूट है।"
भारत, 2026 तक, एक अधिक आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र बन गया है, जो प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक शक्ति, आने वाले वर्षों में इसे और भी महत्वपूर्ण बना देगी।

