भारत का भू-राजनीतिक प्रभाव पिछले दशक में नाटकीय रूप से बढ़ा है, जिससे राष्ट्र एक क्षेत्रीय शक्ति से एक वैश्विक रणनीतिक खिलाड़ी में परिवर्तित हो गया है, जिसका प्रभाव दक्षिण एशिया से कहीं आगे तक फैला है। रक्षा कूटनीति, आर्थिक साझेदारी और बहुपक्षीय नेतृत्व के संयोजन के माध्यम से, नई दिल्ली ने खुद को कई रणनीतिक ढांचों के केंद्र में सफलतापूर्वक स्थापित किया है जो समकालीन अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को परिभाषित करते हैं।
यह परिवर्तन भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति से एक मौलिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे विश्लेषक 'बहु-संरेखण' के रूप में वर्णित करते हैं – रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए विविध शक्ति केंद्रों के साथ समकालीन रूप से जुड़ाव। इस दृष्टिकोण ने रक्षा सहयोग, व्यापारिक संबंधों और कूटनीतिक प्रभाव में महत्वपूर्ण लाभांश दिया है, भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता चाहने वाली प्रमुख शक्तियों के लिए एक अपरिहार्य साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
मुख्य तथ्य
- भारत के रक्षा निर्यात 2023-24 में $2.63 बिलियन तक पहुंचे, जो 32.5% की वृद्धि दर्शाता है
- फिलीपींस में तैनात ब्रह्मोस मिसाइलें दक्षिण पूर्व एशिया में पहला प्रमुख स्वदेशी रक्षा निर्यात है
- भारत G20, SCO और BRICS सहित 40 से अधिक बहुपक्षीय मंचों की अध्यक्षता या सह-अध्यक्षता करता है
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग में 31 देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित
- संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से हिंद-प्रशांत कमान की संलग्नता 14 देशों तक फैली है
भारत की भू-राजनीतिक रणनीति की आधारशिला इसकी रक्षा आधुनिकीकरण और निर्यात क्षमताओं में निहित है। देश दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक होने से एक विश्वसनीय रक्षा निर्यातक के रूप में उभरने की दिशा में बदल गया है, जिससे इसके रणनीतिक संबंधों में मौलिक परिवर्तन आया है। रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली इस परिवर्तन का उदाहरण है – संयुक्त विकास से स्वतंत्र निर्यात क्षमता तक, फिलीपींस पहला अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक बना।
रणनीतिक लाभ के रूप में रक्षा कूटनीति
भारत का रक्षा औद्योगिक परिसर विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है, जो नई दिल्ली को पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के विकल्प चाहने वाले राष्ट्रों को सैन्य हार्डवेयर, प्रशिक्षण और रणनीतिक साझेदारी की पेशकश करने में सक्षम बनाता है। रक्षा में मेक इन इंडिया पहल ने न केवल आयात निर्भरता को कम किया है बल्कि निर्यात योग्य अतिरिक्त क्षमता भी बनाई है जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है।
तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम इस रणनीति का एक और आयाम दर्शाता है। जबकि शुरुआत में घरेलू आवश्यकताओं के लिए डिज़ाइन किया गया था, विमान ने अंतर्राष्ट्रीय रुचि जगाई है, दक्षिण पूर्व एशियाई और लैटिन अमेरिकी राष्ट्रों में संभावित निर्यात के साथ। यह स्वदेशी क्षमता भारत को बातचीत में लाभ प्रदान करती है जबकि साझेदार राष्ट्रों को उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी तक पहुंच प्रदान करती है, बिना उन राजनीतिक शर्तों के जो अक्सर प्रमुख शक्ति आपूर्तिकर्ताओं से जुड़ी होती हैं।
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AI समाचार ब्यूरो
लोकतंत्रवाणी AI, Claude और Gemini द्वारा संचालित—गहन शोध और तथ्य-जाँच पत्रकारिता।