केंद्रीय गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने चीन के साथ विवादित सीमा पर अपने सीमा निगरानी अभियानों में नाटकीय रूप से वृद्धि की है, जिसमें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अप्रैल से दिसंबर 2024 तक अभूतपूर्व 4,503 गश्त संचालित की हैं। यह गलवान घाटी के स्तर से पहले की गश्त आवृत्ति में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्शाता है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि जून 2020 की सीमा झड़प ने भारत के सबसे लंबी और सबसे संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय सीमा के प्रबंधन के दृष्टिकोण को मौलिक रूप से बदल दिया।
गश्ती गतिविधि में यह उछाल 45 वर्षों में भारतीय और चीनी बलों के बीच सबसे घातक टकराव के बाद भारत की सीमा प्रबंधन नीति में रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। गलवान घाटी की घटना, जिसके परिणामस्वरूप 1975 के बाद से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहली बार युद्ध में मौतें हुईं, द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई और भारत के सीमा सुरक्षा ढांचे के व्यापक पुनर्मूल्यांकन को प्रेरित किया।
मुख्य तथ्य
- 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2024 तक 4,503 आईटीबीपी गश्त संचालित
- आईटीबीपी निगरानी के तहत 3,488 किलोमीटर चीन सीमा
- 2024 में औसतन 500 गश्त प्रति माह बनाम 2017-18 में 173 प्रति माह
- गश्त में छोटी दूरी, लंबी दूरी, विशेष मिशन और संयुक्त अभियान शामिल
- 2017-18 से गश्त आवृत्ति में लगभग 190% वृद्धि
ऐतिहासिक आंकड़ों के मुकाबले देखा जाए तो गश्ती पैटर्न में परिवर्तन स्पष्ट हो जाता है। 2017-18 में, आईटीबीपी चीन सीमा पर औसतन लगभग 173 गश्त प्रति माह करती थी। 2024 के आंकड़े मासिक औसतन लगभग 500 गश्त दिखाते हैं, जो परिचालन गति में लगभग 190 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि गलवान टकराव के बाद से भारत-चीन सीमा प्रबंधन की विशेषता वाली उच्च सतर्कता की स्थिति को दर्शाती है।
आईटीबीपी के विस्तारित परिचालन अधिकार क्षेत्र में निगरानी गतिविधियों की कई श्रेणियां शामिल हैं, जिसमें विवादित सीमा की निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई छोटी दूरी और लंबी दूरी की गश्त शामिल हैं। विशेष मिशन और अन्य सुरक्षा बलों के साथ संयुक्त गश्त बल की बेहतर सीमा प्रबंधन रणनीति के अभिन्न घटक बन गए हैं, जो सीमांत सुरक्षा के लिए अधिक समन्वित और गहन दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
15 जून, 2020 की गलवान घाटी की घटना ने भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक गणना को मौलिक रूप से बदल दिया। यह टकराव, जो सप्ताहों की सैन्य तैनाती के बाद एक तनाव-शमन प्रक्रिया के दौरान भड़का था, के परिणामस्वरूप 20 भारतीय सैनिकों की मृत्यु हुई और अज्ञात संख्या में चीनी कर्मियों की हानि हुई। यह झड़प ऐसे समय हुई जब दोनों राष्ट्र पहले से ही 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई बिंदुओं पर तनावपूर्ण गतिरोध में शामिल थे।
आंकड़ों के अनुसार
Reporting Notes
AI-assisted report. Source links and attribution are shown for reader verification.
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About the Author
आचार्य अशोक कुमार चौधरीदक्षिणपंथी विचारक
सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंक अधिकारी | वरिष्ठ कार्यकर्ता (बीएमएस) | पूर्व राष्ट्रीय सचिव AIGBOO (संबद्ध: बीएमएस) पूर्व चेयरमैन, क्षेत्रीय परामर्श दात्री समिति, दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड (श्रम एवं नियोजन मंत्रालय, भारत सरकार) | समसामयिक विषयों के स्वतंत्र शोधकर्ता, लेखक, समीक्षक, विचारक एवं सामाजिक चिंतक
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