नई दिल्ली – भारत के रक्षा औद्योगिक परिसर ने एक परिवर्तनकारी दशक को चिह्नित किया है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादन और निर्यात दोनों में रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धियों के साथ समाप्त हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 4 जुलाई, 2026 को घोषणा की कि देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2014-15 में दर्ज उत्पादन स्तरों की तुलना में तीन गुना की मजबूत वृद्धि दर्शाता है, जो भारत की रणनीतिक क्षमताओं और आर्थिक प्रक्षेपवक्र में एक गहरा बदलाव का संकेत है।
घरेलू विनिर्माण में वृद्धि के साथ-साथ रक्षा निर्यात में भी उतनी ही प्रभावशाली वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, भारत का रक्षा निर्यात ₹38,000 करोड़ को पार कर गया, जिसने एक और ऐतिहासिक मानदंड स्थापित किया। यह निर्यात मात्रा वित्तीय वर्ष 2013-14 में दर्ज ₹686 करोड़ से लगभग 57 गुना की असाधारण वृद्धि दर्शाती है। यह नाटकीय विस्तार भारत को केवल वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक उभरते हुए योगदानकर्ता और प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करता है, जो निरंतर नीतिगत ध्यान और रणनीतिक निवेश की प्रभावशीलता का प्रमाण है।
मुख्य तथ्य
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँचा।
- यह उत्पादन आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2014-15 की तुलना में तीन गुना अधिक है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात ₹38,000 करोड़ से अधिक रहा।
- निर्यात वित्तीय वर्ष 2013-14 में ₹686 करोड़ से लगभग 57 गुना बढ़ा।
- यह वृद्धि 'मेक इन इंडिया' पहल के कारण हुई।
स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता का उत्थान
पिछले एक दशक में महत्वपूर्ण आयात निर्भरता से एक दुर्जेय स्वदेशी विनिर्माण शक्ति बनने की यात्रा को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। सरकार द्वारा समर्थित 'मेक इन इंडिया' पहल इस परिवर्तन की आधारशिला रही है। घरेलू उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देकर, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करके और खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके, इस पहल ने भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नई जान फूंक दी है। ध्यान एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने और देश के भीतर प्रौद्योगिकी के आत्मसात्करण को सुनिश्चित करने पर रहा है।
वित्तीय वर्ष 2014-15 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक रक्षा उत्पादन में तीन गुना वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है; यह भारत की रणनीतिक सोच के एक मौलिक पुनर्संरचना को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, भारत रक्षा उपकरणों के दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक रहा है। यह निर्भरता अक्सर भू-राजनीतिक कमजोरियों, उच्च लागतों और तकनीकी स्वायत्तता पर सीमाओं के साथ आती थी। हालांकि, वर्तमान प्रक्षेपवक्र एक ऐसे भविष्य की ओर इशारा करता है जहां भारत के सशस्त्र बल मुख्य रूप से 'मेड इन इंडिया' समाधानों से लैस होंगे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और परिचालन स्वतंत्रता बढ़ेगी। यह बदलाव पर्याप्त आर्थिक लाभ भी पैदा करता है, उच्च-कुशल नौकरियां पैदा करता है, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देता है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
